5 ساعت ·ترجمه کردن

शुभ रात्रि:
दीवानगी हुस्नसे भीगी ईष्ककी, बयां नहीं होती,
पल पल ,ख्वाबोंमे खिले ऐहसासोंसे, उजागर होती,
दिल्लगीसे जब ,खिलता,शाम ए रातोंका काफिला,
मदहोशीसेही रगोंरगोंमे खिलता,भीगी आरजूका,
सिलसिला!
( स्वरचित शायरी)

image