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Good evening 🌅
जबसे नूर हुस्नका नूर देखा तेरा,
बस ईष्कका खिला खुमार दिल में मेरा,
मदहोशी तो अब खिली रगोरगोंमे,
बता कब मनाये,ईष्ककी महफिलें,उन भीगी वादियोंमे!
( स्वरचित शायरी)

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