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Good evening 🌅 जबसे नूर हुस्नका नूर देखा तेरा, बस ईष्कका खिला खुमार दिल में मेरा, मदहोशी तो अब खिली रगोरगोंमे, बता कब मनाये,ईष्ककी महफिलें,उन भीगी वादियोंमे! ( स्वरचित शायरी)
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Satish Raktawan
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