शुभ रात्रि
ख़ामोश समंदरकी वादियोंमे,खिला ईष्कका बहारा,
जो महका तेरे जन्नतसे हुस्नसे,बनके सुकुनभरा सहारा,
पल पल ,सजे ,इस रातकी आगोशका,ये जवां,नजारा!
(स्वरचित शायरी)

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